हिमालय में भूमि क्षरण: चुनौतियाँ और संरक्षण रणनीतियाँ

Authors

  • डॉ. अम्बरीश कुमार प्रधान वैज्ञानिक, भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान देहरादून Author

Abstract

भारत के हिमालय में वन क्षेत्रों में भूमि क्षरण एक गंभीर समस्या है। इस क्षेत्र में 40 प्रतिशत छत्र वाले खुले वनों के अंतर्गत क्षेत्रफल (कुल भौगोलिक क्षेत्र, टीजीए का 3.06 प्रतिशत) राष्ट्रीय औसत (टीजीए का 2.52 प्रति शत) से अधिक है। डेटा विश्लेषण से पता चला है कि उत्तर पश्चिमी हिमालय (एनडब्ल्यू एच) की तुलना में उत्तर पूर्वी हिमालय (एनईएच) में खुले वनों के कारण भूमि क्षरण लगभग छह गुना अधिक गंभीर है। एनईएच में स्थानांतरित खेती और अंधाधुंध वनों की कटाई अधिक प्रचलित है। जबकि देश भर में केवल 1.79 प्रति शत टीजीए बंजर और पथरीली बंजर भूमि से प्रभावित है, यह आंकड़ा हि मालयी क्षेत्र में 6.69 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। पथरीली बंजर भूमि का क्षरण विशेष रूप से एनडब्ल्यू एच में गंभीर है, जि समें 11.55 प्रति शत टीजीए प्रभावित है, जो (एनईएच टीजीए का 1.02 प्रति शत) की तुलना में लगभग 11 गुना अधिक है।

Published

2025-02-10