जूट और उसके डेरिवेटिव के निर्यात रुझान

Authors

  • नवीन जोस आईसीएआर-राष्ट्रीय प्राकृतिक फाइबर इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान, कोलकाता Author
  • विद्या भूषण शंभू आईसीएआर-राष्ट्रीय प्राकृतिक फाइबर इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान, कोलकाता Author
  • संजय देबनाथ आईसीएआर-राष्ट्रीय प्राकृतिक फाइबर इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान, कोलकाता Author
  • प्रतीक श्रीवास्तव आईसीएआर-राष्ट्रीय प्राकृतिक फाइबर इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान, कोलकाता Author
  • दिनेश बाबू शाक्यवार आईसीएआर-राष्ट्रीय प्राकृतिक फाइबर इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान, कोलकाता Author

Abstract

जूट और मेस्टा प्राकृतिक, पौधे-आधारित रेशे हैं जो क्रमशः कॉर्को रस और हिबि स्कस जेनेरा से प्राप्त होते हैं। ये फसलें गर्म , आर्द्र जलवायु में पनपती हैं, जो उन्हें उष्णकटि बंधीय और उपोष्णकटि बंधीय क्षेत्रों में खेती के लि ए आदर्श बनाती हैं। दोनों रेशों का पारंपरिक और औद्योगि क अनुप्रयोगों में उपयोग का एक लंबा इति हास है, जो सि ंथेटि क सामग्रिय ों के लि ए संधारणीय विकल्प प्रदान करते हैं। प्राय ः ’गोल्डन फाइबर’ के रूप में प्रशंसि त, जूट सबसे बहुमुखी प्राकृति क रेशों में से एक है। इसकी पर्यावरण के अनुकूल, बायोडिग्रेड ेबल और संधारणीय विशेषताओं ने विभि न्न क्षेत्रों में माँग में वृद्धि की है। पारंपरिक रूप से पैकेजि ंग और टेक्सटाइल के लि ए उपयोग कि ए जाने वाले जूट का अब कंपोजि ट, जिय ोटेक्सटाइल और हस्तशि ल्प सहि त कई उत्पा दों में उपयोग हो रहा है। मेस्टा , मुख्य रूप से हिबि स्कस कैनाबि नस (केनाफ) और हिबि स्कस सब्डरिफा (रोसेल) से प्राप्त होता है, एक तेजी से बढ़ने वाली फाइबर फसल है जो विभि न्न जलवायु परिस्थितिय ों के अनुकूल हो सकती है। जूट की तुलना में थोड़ा मोटा होने के बावजूद, मेस्टा फाइबर को प्राय ः जूट के साथ मिश्रि त करके रस्सिय ाँ, चटाई और वस् त्र जैसे कई उत्पा द बनाए जाते हैं। जूट और मेस्टा दोनों ही नवीकरणीय संसाधन हैं जि नका पर्यावरण पर न्यू नतम प्रभाव पड़ता है। इनकी खेती से मि ट्टी की उर्वरता में सुधार हो सकता है, कार्ब न उत्सर्ज न कम हो सकता है और ग्रामीण आजीविका में योगदान हो सकता है।

Published

2025-02-10