पुनर्योजी कृषिः लचीलापन बनाना और हमारा भविष्य सुरक्षित करना

Authors

  • आर. एस. परोदा ट्रस्ट फॉर द एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज Author

Abstract

आज कृषि अनेक गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, इनमें बढ़ती जनसंख्या का सीमित प्राकृति क संसाधनों पर दबाव, मृदा स्वा स्थ्य में गिरावट, जल की कमी, और जलवायु परिवर्तन का बढ़ता प्रभाव सम्मिलित हैं। वर्तमान खेत प्रणालि याँ भवि ष्य की खाद्य मांग को पूरा करने के दबाव में हैं, वह भी बि ना मि ट्टी और पर्यावरणीय स्वा स्थ्य को हानि पहुँचाए। अवैज्ञानि क खेती और पशुपालन प्रथाएँ, रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का असंतुलित और अत्यधिक उपयोग, तथा मृदा क्षरण, ये सभी ग्री नहाउस गैस उत्सर्जन में वृद्धि कर रहे हैं (टीएएस, 2021)। इसलि ए खाद्य उत्पा दन में एक परिवर्तनकारी दृष्टि कोण की आवष्यकता आज पहले से अधि क है। पुनर्योजी कृषि एक ऐसा समाधान प्रस्तुत करती है, जो प्रकृति के साथ मि लकर काम करती है, पारिस्थिति क तंत्रों को पुनर्सपित करती है और मि ट्टी के स्वा स्थ्य का पुनर्निर ्माण करते हुए जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने में सहायता सहायता करती है (खंगुरा एवं अन्य, चैधरी एवं अन्य, 2024)।

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Published

2025-12-31