वाटरशेड विकास कार्यक्रमः देश की खाद्य, ऊर्जा और जलवायु सुरक्षा सुनिश्चित करने का समाधान

लेखक

  • डॉ. सी.पी. रेड्डी वरिष्ठ अतिरिक्त आयुक्त, भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली Author

सार

भारत में विश्व की 17.76 प्रतिशत मानव जनसंख्या और 11.54 प्रतिशत पशुधन (दुनिय की 56.7 प्रति शत भैंस, 20.4 प्रति शत छोटे जुगाली करने वाले जानवर, 12.5 प्रति शत मवेशी, 3.1 प्रति शत मुर्गी) रहते हैं, जो दुनिय ा के मात्र 2.4 प्रति शत भूभाग पर स्थि त है। विश्व की तुलना में भारत में प्रति व्यक्ति भूमि की उपलब्धता बहुत कम है, यानि विश्व में प्रति व्यक्ति भूमि उपलब्धता 1.75 हेक्टेय र की तुलना में भारत में प्रति व्यक्ति भूमि उपलब्धता 0.23 हेक्टेय र है। जनसंख्या दबाव, भूमि और पानी की माँग में तेजी से वृद्धि और इसके परिणामस्वरूप प्राकृति क संसाधनों का क्रमि क क्षरण पारिस्थिति की तंत्र और पर्यावरण के लचीलेपन को प्रभावित कर रहा है। मानव बस्तिय ों और मूल ढांचे का विस्ता र, कृषि और संबद्ध गतिव िधिय ों का तेज होना और सीमांत क्षेत्रों और कोमल पारिस्थिति क तंत्रों में उनकी घुसपैठ भूमि संसाधन की एकीकृत योजना और प्रबंधन की तत्का ल माँग करती है।

प्रकाशित

2025-02-10